वज़ू से पहले और बाद की दुआ | Wazu Se Pehle Aur Baad Ki Dua
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वज़ू से पहले और बाद की दुआ | Wazu Se Pehle Aur Baad Ki Dua


Wazu Se Pehle Aur Baad Ki Dua | वजू की दुआ हिंदी में फ़ज़ीलत के साथ वज़ू से पहले और बाद की दुआ हिंदी में जानिए। वज़ू की फ़ज़ीलत, सही दुआ और नमाज़ में सुकून पाने का सुन्नत तरीका पढ़ें।

इस्लाम ने जिस तरह इंसान की ज़िंदगी के हर पहलू को पाकीज़गी से जोड़ा है, उसी तरह नमाज़ से पहले वज़ू को भी एक मामूली काम नहीं, बल्कि मुकम्मल इबादत बनाया है। वज़ू सिर्फ़ हाथ-मुँह धोने का नाम नहीं है, बल्कि यह इंसान के ज़ाहिर के साथ-साथ उसके बातिन को भी पाक करता है। जब एक मोमिन वज़ू करता है, तो असल में वह अल्लाह के सामने हाज़िर होने की तैयारी करता है।

अक्सर देखा गया है कि लोग वज़ू तो करते हैं, लेकिन वज़ू से पहले और बाद की दुआ की तरफ़ तवज्जो नहीं देते। जबकि यही दुआएँ वज़ू को आम सफ़ाई से उठाकर इबादत के दर्जे तक पहुँचा देती हैं। इस article में हम वज़ू से पहले पढ़ी जाने वाली दुआ, वज़ू के बाद की मुकम्मल दुआ, उनकी फ़ज़ीलत और उनके रूहानी असर को तफ़सील से समझेंगे।


वज़ू का मतलब और इसकी हक़ीक़त : Wazu Se Pehle Aur Baad Ki Dua

अरबी ज़ुबान में “वज़ू” का मतलब है नूर, सफ़ाई और रौशनाई। शरीअत की इस्तिलाह में वज़ू उस अमल को कहते हैं, जिसमें नमाज़ से पहले जिस्म के कुछ ख़ास आज़ा को पाक पानी से धोया जाता है। लेकिन अगर ग़ौर किया जाए तो वज़ू सिर्फ़ पानी से जिस्म धोने तक महदूद नहीं है।

नबी-ए-करीम ﷺ ने फ़रमाया कि जब बंदा वज़ू करता है, तो उसके गुनाह पानी के साथ झड़ जाते हैं। यानी वज़ू इंसान को सिर्फ़ बाहर से नहीं, अंदर से भी पाक करता है। यही वजह है कि बिना वज़ू के नमाज़ क़ुबूल नहीं होती, क्योंकि अल्लाह तआला पाकीज़गी को पसंद फ़रमाता है।


वज़ू से पहले की दुआ और उसका मक़सद- Wazu Se Pehle Aur Baad Ki Dua

जब एक मोमिन वज़ू शुरू करता है, तो सबसे पहले उसे अल्लाह का नाम लेना चाहिए। वज़ू से पहले पढ़ी जाने वाली दुआ बहुत छोटी है, लेकिन उसका असर बहुत गहरा है।

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
(अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ, जो बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है) Wazu Se Pehle Aur Baad Ki Dua

इस दुआ का मक़सद यह है कि इंसान अपने इस अमल को अल्लाह के हवाले कर दे। जब वज़ू अल्लाह के नाम से शुरू होता है, तो वह महज़ आदत नहीं रहता, बल्कि इबादत बन जाता है। हदीस में आता है कि जिस शख़्स ने अल्लाह का नाम लेकर वज़ू नहीं किया, उसका वज़ू मुकम्मल नहीं होता। यानी वज़ू तो हो जाएगा, लेकिन उसकी कामिलियत और सवाब में कमी रह जाएगी।

आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में लोग जल्दबाज़ी में नल खोलते हैं और बिना कुछ सोचे-समझे वज़ू कर लेते हैं। लेकिन अगर वज़ू से पहले सिर्फ़ एक पल रुककर बिस्मिल्लाह कह ली जाए, तो इंसान का ध्यान दुनिया से हटकर अल्लाह की तरफ़ हो जाता है।Wazu Se Pehle Aur Baad Ki Dua


वज़ू का हर क़तरा और गुनाहों की माफ़ी

वज़ू करते वक़्त जब इंसान अपने हाथ धोता है, तो उन हाथों से किए गए गुनाह झड़ जाते हैं। मुँह धोने से ज़ुबान की ग़लतियाँ माफ़ होती हैं, आँखें धोने से नज़र के गुनाह धुल जाते हैं, और पैरों से हर वह क़दम मिट जाता है जो अल्लाह की नाफ़रमानी की तरफ़ बढ़ा हो।

यह कोई आम बात नहीं, बल्कि नबी ﷺ की सहीह हदीसों से साबित है। यानी वज़ू इंसान के लिए रोज़ाना तौबा का एक अमली ज़रिया है। इसी लिए उलमा कहते हैं कि वज़ू जितना इत्मिनान और तवज्जो से किया जाए, उतना ही ज़्यादा अज्र मिलता है। Wadu guide


वज़ू के बाद की दुआ और उसकी रूहानियत

जब वज़ू मुकम्मल हो जाए, तो उस वक़्त भी अल्लाह ने अपने बंदों को खाली नहीं छोड़ा। वज़ू के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ इंसान को जन्नत से जोड़ देती है।

वज़ू के बाद की दुआ इस तरह है:

अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाह, वहदहू ला शरीक लहू,
व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू

इस दुआ का मतलब यह है कि इंसान अल्लाह की वहदानियत और नबी ﷺ की रिसालत की गवाही देता है। यानी वज़ू के बाद इंसान अपने ईमान को ताज़ा करता है। Wazu Se Pehle Aur Baad Ki Dua

Wazu ke Baad Ki Dua

हदीस में आता है कि जो शख़्स वज़ू करके यह दुआ पढ़ता है, उसके लिए जन्नत के आठों दरवाज़े खोल दिए जाते हैं, और वह जिस दरवाज़े से चाहे दाख़िल हो सकता है। सोचिए, सिर्फ़ वज़ू और एक दुआ… और बदले में जन्नत का वादा।


क्यों वज़ू के साथ दुआ ज़रूरी है?- Wazu Se Pehle Aur Baad Ki Dua

आज बहुत से लोग शिकायत करते हैं कि उनकी नमाज़ में ख़ुशू नहीं रहता, दिल भटकता रहता है, सुकून महसूस नहीं होता। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि हम वज़ू को सिर्फ़ एक फ़र्ज़ी तैयारी समझते हैं। Wazu Se Pehle Aur Baad Ki Dua

जब वज़ू बिना दुआ के किया जाता है, तो वह जिस्मानी सफ़ाई तक सीमित रह जाता है। लेकिन जब वज़ू दुआ और ज़िक्र के साथ किया जाए, तो वह इंसान के दिल को नरम कर देता है। दुआ इंसान को याद दिलाती है कि वह किस के सामने खड़ा होने वाला है। Epstein File क्या है?


आम ग़लतियाँ जो वज़ू में हो जाती हैं

अक्सर लोग जल्दबाज़ी में वज़ू करते हैं, सुन्नतों को छोड़ देते हैं और ध्यान मोबाइल या बातों में लगा रहता है। कुछ लोग वज़ू के बाद फ़ौरन दुनिया की बातों में मशग़ूल हो जाते हैं, जबकि वही वक़्त दुआ के लिए सबसे क़ीमती होता है।

अगर इंसान वज़ू को इत्मिनान से करे, अल्लाह का ज़िक्र करे और दुआ पढ़े, तो वही वज़ू उसकी नमाज़ को ज़िंदा कर देता है।


नतीजा

वज़ू एक मामूली अमल नहीं, बल्कि नमाज़ की बुनियाद है। और वज़ू से पहले और बाद की दुआ उस बुनियाद में जान डाल देती है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी नमाज़ सिर्फ़ रस्म न रहे, बल्कि दिल से अदा हो, तो आज से वज़ू को दुआ के साथ करना शुरू कर दीजिए।

यक़ीन मानिए, नमाज़ में सुकून, दिल में नरमी और ज़िंदगी में बरकत ख़ुद-ब-ख़ुद महसूस होगी। Wazu Se Pehle Aur Baad Ki Dua

❓ वज़ू से पहले और बाद की दुआ – सवाल और जवाब (FAQ)


❓ वज़ू से पहले कौन सी दुआ पढ़ी जाती है?

वज़ू शुरू करने से पहले “बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम” पढ़ना सुन्नत है। इससे वज़ू में बरकत आती है, गुनाह माफ़ होते हैं और इबादत का सवाब बढ़ जाता है।


❓ वज़ू के बाद कौन सी दुआ पढ़नी चाहिए?

वज़ू पूरा करने के बाद यह दुआ पढ़ना अफ़ज़ल माना गया है:

“अश्हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहु ला शरीक लहू, व अश्हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू।”

हदीस में आता है कि इसे पढ़ने वाले के लिए जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं।


❓ क्या वज़ू की दुआ पढ़ना फर्ज है?

नहीं, वज़ू से पहले और बाद की दुआ पढ़ना फर्ज नहीं बल्कि सुन्नत है। अगर कोई नहीं पढ़ता तो वज़ू हो जाता है, लेकिन पढ़ने में बहुत बड़ा अज्र और फज़ीलत है।


❓ अगर वज़ू की दुआ भूल जाएं तो क्या वज़ू होगा?

जी हाँ, वज़ू हो जाएगा। दुआ छोड़ने से वज़ू टूटता नहीं। मगर कोशिश करनी चाहिए कि याद रखकर पढ़ें ताकि सुन्नत पर अमल हो।


❓ वज़ू के बाद दुआ पढ़ने का सबसे बड़ा फायदा क्या है?

सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि हदीस के मुताबिक जन्नत के आठों दरवाज़े खोल दिए जाते हैं और बंदा जिस दरवाज़े से चाहे दाखिल हो सकता है।


❓ क्या हर नमाज़ से पहले वज़ू की दुआ पढ़नी चाहिए?

जब भी वज़ू करें, चाहे नमाज़ के लिए हो या कुरआन पढ़ने के लिए — दुआ पढ़ना बेहतर और सवाब का काम है।


❓ क्या वज़ू की दुआ हिंदी में पढ़ सकते हैं?

अरबी में पढ़ना ज्यादा अफ़ज़ल है, लेकिन जो याद न कर पाए वह हिंदी में मतलब समझकर भी पढ़ सकता है। धीरे-धीरे अरबी याद करने की कोशिश करनी चाहिए।


❓ वज़ू की दुआ पढ़ने से क्या गुनाह माफ़ होते हैं?

जी हाँ, वज़ू खुद गुनाहों को धो देता है, और दुआ पढ़ने से सवाब कई गुना बढ़ जाता है।


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