सलातुल तस्बीह नमाज़ कैसे पढ़ी जाती है? जानिए चार रकात सलातुल तस्बीह का आसान तरीका, कितनी तस्बीह होती है, पूरी नमाज़ का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका हिंदी में। Salatul Tasbeeh Ki Namaz
✅सलातुल तस्बीह की नमाज़ का तरीका
✅ सलातुल तस्बीह कैसे पढ़ें
✅ Salatul Tasbeeh ka tarika aur Salatul Tasbeeh namaz kaise padhe फिर हम बात करेंगे सलातुल तस्बीह पढ़ने का सही तरीका
✅ सलातुल तस्बीह का मुकम्मल तरीका
✅ बहुत ज़्यादा फ़ज़ीलत (Spiritual, Practical, Akhirat)
✅ हदीस रेफ़रेंस (authentic classical books)
Salatul Tasbeeh Ki namaz कैसे पढ़ी जाती है
सलातुल तस्बीह चार रकात नफ़्ल नमाज़ होती है, जिसे अकेले पढ़ा जाता है। इस नमाज़ में एक ख़ास तस्बीह “सुभानल्लाहि वल-हम्दु लिल्लाहि व-ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर” को अलग-अलग हालात में पढ़ा जाता है। हर रकात में यह तस्बीह 75 बार और कुल चार रकात में 300 बार पढ़ी जाती है।
सलातुल तस्बीह में कितनी तस्बीह होती है
सलातुल तस्बीह की नमाज़ में कुल 300 तस्बीह होती हैं। हर रकात में 75 तस्बीह पढ़ी जाती है, जो सना के बाद, सूरह के बाद, रुकू, रुकू से उठकर, दोनों सजदों और उनके बीच बैठने की हालत में पूरी की जाती हैं।
सलातुल तस्बीह की पूरी नमाज़ बताइए
Salatul Tasbeeh Ki namaz की पूरी नमाज़ चार रकात में अदा की जाती है। हर रकात में सना, सूरह फ़ातिहा, कोई सूरह, रुकू, क़ौमा और दो सजदे होते हैं, लेकिन हर हालात में तय संख्या में तस्बीह भी पढ़ी जाती है। चारों रकात पूरी करने पर 300 बार तस्बीह मुकम्मल होती है।
Salatul Tasbeeh Ki namaz का आसान तरीका बताओ
Salatul Tasbeeh Ki Namaz का सबसे आसान तरीका यह है कि हर रकात को 75 तस्बीह का एक पैकेज समझ लें। सना के बाद 15, फिर हर अगले मुकाम पर 10-10 तस्बीह पढ़ते जाएँ। अगर कहीं गिनती भूल जाएँ, तो जहाँ याद आए वहीं पूरी कर लें, नमाज़ खराब नहीं होती।
चार रकात सलातुल तस्बीह कैसे पढ़ें
चार रकात Salatul Tasbeeh Ki namaz उसी तरह पढ़ी जाती है जैसे आम नफ़्ल नमाज़, फर्क सिर्फ़ तस्बीह का है। पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी—हर रकात में बिल्कुल एक जैसा तरीका दोहराया जाता है, और आख़िरी क़ाअदा में दुरूद और दुआ पढ़कर सलाम फेरा जाता है।
कोई बेकार की बातें नहीं, सिर्फ़ वही जो आपने मांगा है।
सलातुल तस्बीह की नमाज़: मुकम्मल तरीका, फ़ज़ीलत, हदीस और रूहानी असर
(Salatul Tasbeeh Ki Namaz – Complete Guide with Fazilat & Hadith)
इमेजिन कीजिए…
आज की रात आसमान में क़लम चल रहा है।
फ़रिश्ते साल भर की क़िस्मत लिख रहे हैं —
कौन बीमार होगा,
कौन सेहत पाएगा,
किसका रिज़्क़ बढ़ेगा,
और किसकी ज़िंदगी का सफ़र पूरा होगा।
लेकिन इस सबके बीच एक सवाल दिल में उठता है:
क्या इंसान सिर्फ़ लिखा हुआ देखने के लिए मजबूर है?
या अल्लाह ने उसे बदलने का हक़ भी दिया है?
इस्लाम का जवाब बहुत साफ़ है —
👉 दुआ और इबादत क़िस्मत बदल देती है।
और उन्हीं इबादतों में एक बेहद ख़ास नाम है:
👉 सलात-उल-तस्बीह
सलातुल तस्बीह क्या है? (What is Salatul Tasbeeh)
Salatul Tasbeeh Ki Namaz एक नफ़्ल नमाज़ है, लेकिन इसकी अहमियत आम नफ़्ल से कहीं ज़्यादा है।
यह नमाज़ रसूलुल्लाह ﷺ ने ख़ास तौर पर गुनाहों की माफ़ी के लिए सिखाई।
इसमें:
- 4 रकात नमाज़
- 1 ख़ास तस्बीह
- कुल 300 बार ज़िक्र
यानी यह नमाज़ सिर्फ़ पढ़ी नहीं जाती,
महसूस की जाती है।
सलातुल तस्बीह की तस्बीह (The Heart of This Prayer)
इस नमाज़ की रूह है यह कलिमा:
سُبْحَانَ اللّٰهِ وَالْحَمْدُ لِلّٰهِ وَلَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَاللّٰهُ أَكْبَرُ
अर्थ:
अल्लाह पाक है, सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है,
उसके सिवा कोई माबूद नहीं, और अल्लाह सबसे बड़ा है।
यह चार चीज़ों का इज़हार है:
- तौहीद
- शुक्र
- अजमत
- आज़िज़ी
सलातुल तस्बीह पढ़ने का मुकम्मल तरीका (Step-by-Step)
(यह हिस्सा आपने सही दिया था, इसलिए यहाँ इल्मी clarity के साथ रखा गया है)
👉 हर रकात में 75 तस्बीह
- सना के बाद – 15
- सूरह के बाद – 10
- रुकू में – 10
- रुकू से उठकर – 10
- पहले सजदे में – 10
- दो सजदों के बीच – 10
- दूसरे सजदे में – 10
👉 चार रकात = 300 तस्बीह
अब असली हिस्सा 👇
सलातुल तस्बीह की फ़ज़ीलत (FAZILAT) – Detail में
1️⃣ सारे गुनाह माफ़ हो जाते हैं (Biggest Fazilat)
रसूलुल्लाह ﷺ ने हज़रत अब्बास (रज़ि.) से फ़रमाया:
“अगर तुम यह नमाज़ पढ़ो, तो अल्लाह तुम्हारे
अगले-पिछले, जानबूझकर-अनजाने में किए हुए,
छोटे-बड़े, छुपे-खुले —
हर तरह के गुनाह माफ़ कर देगा।” Salatul Tasbeeh Ki Namaz
📚 (सुनन अबू दाऊद: 1297, तिर्मिज़ी: 481, इब्न माजा: 1387)
👉 यह बात किसी और नफ़्ल नमाज़ के बारे में नहीं कही गई।
2️⃣ पहाड़ जैसे गुनाह भी मिट जाते हैं
हदीस में आता है:
“अगर तुम्हारे गुनाह रेत के ज़र्रों,
समुंदर की झाग,
या पहाड़ों जितने भी हों —
अल्लाह माफ़ कर देगा।”
📚 (तिर्मिज़ी)
👉 यह अल्लाह की रहमत का ऐलान है,
न कि इंसान की ताक़त का।
3️⃣ जानबूझकर किए गुनाह भी माफ़ होते हैं
यह बहुत बड़ी बात है।
अक्सर लोग सोचते हैं:
“जानबूझकर किए गुनाह माफ़ नहीं होते।”
लेकिन सलातुल तस्बीह की हदीस में ख़ास तौर पर यह शब्द आता है: Salatul Tasbeeh Ki Namaz
“अमदन” (जानबूझकर)
यानि:
- नज़र के गुनाह
- ज़ुबान की ग़लतियाँ
- रिश्तों की नाइंसाफ़ी
सब अल्लाह माफ़ कर सकता है।
4️⃣ दिल की सख़्ती टूट जाती है
जो लोग यह नमाज़ नियमित पढ़ते हैं,
उनका दिल:
- नरम हो जाता है
- गुनाह से नफ़रत करने लगता है
- इबादत में मज़ा आने लगता है
यह नमाज़ रूह की सर्जरी है।
5️⃣ डिप्रेशन और बेचैनी में राहत
कई उलमा ने तजुर्बे से लिखा है:
“जो शख़्स ग़म, टेंशन और बेचैनी में
सलातुल तस्बीह पढ़ता है,
उसका दिल हल्का हो जाता है।”
क्योंकि:
- 300 बार अल्लाह का ज़िक्र
- पूरा ध्यान
- सजदों की कसरत
यह एक Spiritual Therapy है।
6️⃣ क़ब्र की तंगी से राहत
हदीसों और बुज़ुर्गों के बयान से साबित है कि
ज़्यादा सजदे और ज़िक्र:
👉 क़ब्र में नूर बनते हैं
👉 अकेलेपन को दोस्त बनते हैं
सलातुल तस्बीह में सजदों की कसरत है,
इसलिए इसे क़ब्र की तैयारी भी कहा गया।
7️⃣ आख़िरत में वज़नदार अमल
क़यामत के दिन सबसे पहले आमाल तौले जाएँगे।
300 बार तस्बीह:
- मीज़ान (तराज़ू) भारी करती है
- गुनाहों को हल्का करती है Home
सलातुल तस्बीह कब पढ़नी चाहिए?
✔ ज़िंदगी में कम से कम एक बार
✔ शब-ए-बरात
✔ रमज़ान
✔ जुम्मा
✔ किसी बड़ी तौबा के बाद
रसूल ﷺ ने फ़रमाया:
“अगर रोज़ न पढ़ सको, तो
हफ़्ते में, महीने में या साल में एक बार।” सुरह यासीन हिंदी में
📚 (अबू दाऊद)
क्या यह नमाज़ सहीह है? (Authenticity)
कुछ लोग शक करते हैं, लेकिन:
✔ इमाम तिर्मिज़ी
✔ इमाम अबू दाऊद
✔ इमाम इब्न माजा
✔ कई हनफ़ी, शाफ़ई उलमा
ने इसे जायज़ और फ़ज़ीलत वाली नमाज़ कहा है।
आख़िरी पैग़ाम (Conclusion)
सलातुल तस्बीह कोई मामूली नफ़्ल नहीं।
यह:
- टूटे दिल की मरहम है
- गुनाहों की धुलाई है
- अल्लाह से नई शुरुआत है
अगर आज की रात
आप अल्लाह के सामने खड़े होकर
यह नमाज़ पढ़ लेते हैं —
तो हो सकता है
आपका लिखा हुआ कल
आज ही बदल जाए।
आज इस पोस्ट हमने Salatul Tasbeeh Ki Namaz के तरीके को जानने की कोशिश अगर अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों में शर ज़रूर करें