तसव्वुर कीजिये… आप उस ख़ालिक़-ए-क़ायनात (दुनिया को बनाने वाले) से रूबरू होने जा रहे हैं जिसने आपको पैदा किया। क्या हम उसके दरबार में मैले दिल और गंदे हाथों के साथ जाएंगे? हरगिज़ नहीं। वुज़ू का सही तरीका क्या है? “
मंज़र 1: नीयत और आग़ाज़ (शुरुआत)
एक्शन: “बिस्मिल्लाह-इर-रहमान-इर-रहीम पढ़कर अपने दोनों हाथों को कलाईयों तक 3 बार धोएं। उंगलियों के दरमियान ख़िलाल करें, जैसे आप अपने रिश्तों की गिरहों (गांठों) को साफ़ कर रहे हों। याद रखें, नीयत दिल के इरादे का नाम है।
मंज़र 2: कुल्ली और नाक की सफ़ाई
अब यह पाक पानी आपके मुँह में जाता है। यह वही मुँह है जिससे हमने कभी झूठ या ग़ीबत (बुराई) की होगी। 3 बार कुल्ली कीजिये ताकि ज़ुबान साफ़ हो जाए। फिर 3 बार नाक में पानी डालें और बाएं हाथ से उसे साफ़ करें। यह नाक की सफ़ाई आपके दिमाग़ को सुकून और ताज़गी देती है।
मंज़र 3: चेहरे का नूर (चेहरा धोना)
आलिम: “अब चेहरा धोएं… इंसान की शिनाख़्त (पहचान)। माथे के बालों से लेकर ठोड़ी के नीचे तक, और एक कान की लौ से दूसरे कान की लौ तक। मसाइल (नियम) याद रखें: अगर एक सुई की नोक बराबर जगह भी सूखी रह गई, तो वज़ू नहीं होगा। जिनकी दाढ़ी घनी है, वे उंगलियों से जिल्द (skin) तक पानी पहुँचाएं। यही वह पानी है जिससे क़यामत के दिन मोमिन का चेहरा चमक उठेगा।”
मंज़र 4: कुव्वत-ए-अमल (हाथ और कोहनियां)
आलिम: “अपने दोनों हाथों को कोहनियों समेत धोएं। पहले दायां हाथ, फिर बायां। अक्सर लोग जल्दी में कोहनी का पिछला हिस्सा सूखा छोड़ देते हैं—ख़बरदार रहें, कोहनी वज़ू का फ़र्ज़ हिस्सा है। इन हाथों को पाक कीजिये, क्योंकि इन्हीं से हमें नेक अमल करने हैं।”
मंज़र 5: मसह (समर्पण)
आलिम: “मसह… यह वज़ू का सबसे खूबसूरत लम्हा है। गीले हाथों को सर पर फेरना ऐसा है जैसे अल्लाह की रहमत ने आपको ढांप लिया हो। सर का मसह सिर्फ़ एक बार है। फिर उंगलियों से कानों के अंदरूनी और बाहरी हिस्से को साफ़ करें—ताकि हम वही सुनें जो हक़ है।”
मंज़र 6: मंज़िल की सिम्त (पैर धोना)
आलिम: “आख़िर में पैर… जो हमें बुराई से दूर और मस्जिद की सिम्त (ओर) ले जाते हैं। इन्हें टखनों (ankles) तक 3 बार धोएं। टखने वज़ू में फ़र्ज़ हैं। उंगलियों का ख़िलाल करना न भूलें। याद रखें, एड़ियाँ सूखी रह गईं तो वज़ू मुकम्मल नहीं होगा।”
मंज़र 7: इख़्तेताम और दुआ (समापन)
आलिम: “अब आप पाक हैं। आपका जिस्म पाकीज़ा है और रूह मुतमइन (शांत) है। अब वह दुआ पढ़ें जो जन्नत के आठों दरवाज़े खोल देती है: ‘अश-हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वह-दहू ला शरीका लहू…’ (कलमा-ए-शहादत)। अब जब आप सज्दे में जाएंगे, तो आप अपने रब को अपने सबसे करीब पाएंगे।”