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हलाला क्या है इस्लाम में हलाला क्या होता है-halala ka matlab kya hota hai
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हलाला क्या है?: इस्लाम में हलाला क्या होता है-halala ka matlab kya hota hai

हलाला क्या है इस्लाम में हलाला क्या होता है-halala ka matlab kya hota hai
हलाला क्या है? -halala ka matlab kya hota hai

इस्लाम में हलाला क्या है? – गहराई से समझें कुरान और हदीस के संदर्भ में

हलाला “halala” इस्लामी शरीयत का एक अहम मसला है, जिसे अक्सर गलतफहमी और विवादों के साथ देखा जाता है। इसे समझने के लिए कुरान और हदीस का अध्ययन करना बेहद जरूरी है। हलाला का अहम मकसद एक महिला को दोबारा अपने पहले पति से निकाह करने से पहले कुछ जरूरी शर्तों को पूरा करना है, लेकिन इस शर्त के पीछे की हकीकत को जानना बहुत ज़रूरी है।

हलाला क्या है?: what is halala in hindi

हलाला का मूल विचार

इस्लाम में तीन प्रकार के तलाक होते हैं: halala ka matlab kya hota hai
  1. तलाक-ए-अहसन – सबसे अच्छा और सुन्नत के मुताबिक।
  2. तलाक-ए-हसन – थोड़ा अलग तरीका, लेकिन शरई। halal in islam
  3. तलाक-ए-बिदअत – एक साथ तीन तलाक देना, जो इस्लाम में निंदनीय और बिदअत मानी जाती है।

अगर पति तीन तलाक दे देता है, तो उस तलाक को अंतिम माना जाता है और पत्नी से दोबारा निकाह करना संभव नहीं होता, जब तक कि वह किसी और मर्द से शादी न कर ले और वैध तरीके से उसे तलाक न हो जाए। इसे इस्लाम में हलाला कहा जाता है।

हलाला क्या है? यह हलाला “halala” एक ‘शरई’ (धार्मिक) प्रक्रिया है, लेकिन इसे केवल इस शर्त पर किया जा सकता है कि दूसरी शादी सच्ची हो, यानी एक ‘समझौता’ (contract marriage) के तौर पर न हो।

कुरान में हलाला

हलाला की तसव्वुर को कुरान में साफ़ रूप से समझाया गया है। अल्लाह तआला ने फरमाया: halala kya hota hai hindi

कुरान में हलाला (सूरह अल-बकरा 2:230)

इस आयत से स्पष्ट है कि तीन तलाक के बाद पूर्व पति और पत्नी के बीच निकाह तभी हो सकता है जब पत्नी ने दूसरी शादी की हो और वह वैध तरीके से समाप्त हो जाए। नमाज़ सीखें

हदीस में हलाला: Halala in muslim law

हदीस में भी हलाला को लेकर सख्त रहनुमाई दिए गए हैं। नबी-ए-करीम ﷺ ने उन लोगों पर लानत भेजी है, जो हलाला को गलत नीयत के साथ इस्तेमाल करते हैं। हलाला क्या है?
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:

“अल्लाह ने हलाला करने वाले और हलाला करवाने वाले दोनों पर अपनी फटकार और लानत भेजी है।”

(अबू दाऊद 2076, तिर्मिज़ी 1119)

halala in muslim law

इस हदीस से साफ तौर पर पता चलता है कि अगर हलाला सिर्फ इस मक़सद से किया जाए कि वह महिला फिर से पहले पति से निकाह कर सके, तो यह इस्लाम में हराम (निषिद्ध) है। इसे शरई तरीके से नहीं माना जाता।

हलाला की दो किस्में (रूप) होती हैं: शरई हलाला और मुहल्लिल हलाला। halal in islam

  1. शरई हलाला वह है जो शरीयत के मुताबिक Natural तरीके से होता है। इसमें पत्नी तलाक के बाद किसी और व्यक्ति से शादी करती है, और अगर वह नया निकाह वैध तरीके से समाप्त हो जाता है (मौत या तलाक के जरिए), तो फिर पूर्व पति से निकाह कर सकती है।
  2. मुहल्लिल हलाला वह है जिसमें हलाला का दुरुपयोग किया जाता है। इसमें जानबूझकर, प्लानिंग के तहत एक व्यक्ति से अस्थायी निकाह करवाया जाता है ताकि वह तलाक दे और महिला फिर अपने पहले पति से निकाह कर सके। इस प्रकार का हलाला इस्लाम में हराम (निषिद्ध) है।

हलाला के पीछे की हिकमत (मकसद)

इस्लामी शरीयत में हलाला का असली मकसद यह है कि तलाक को हल्के में न लिया जाए। हलाला क्या है? तीन तलाक की प्रक्रिया को गंभीरता से लिया जाए और पति-पत्नी के रिश्ते को बिना सोचे-समझे तोड़ने से रोका जाए। इसका मकसद लोगों को बार-बार तलाक और शादी के खेल से बचाना है। जब तलाक के बाद हलाला की शर्त लगाई गई, तो इसका मकसद यह था कि तलाक से पहले लोग सोच-समझकर फैसला करें।

हलाला के गलत उपयोग

आज के समय में, हलाला का गलत उपयोग एक व्यापार या योजना के तौर पर किया जाता है, जहां कुछ लोग ‘हलाला निकाह’ के नाम पर पैसे लेकर शादी करते हैं और फिर तलाक देते हैं। यह इस्लामी शिक्षाओं के खिलाफ है और इसे शरई तौर पर निंदनीय माना गया है।

हलाला क्या है? इस्लाम में ऐसा कोई भी काम जो नीयत में खोट लेकर किया जाए, हराम माना जाता है। हलाला का असल मक़सद तालुकात को सुधारना और तलाक की गंभीरता को समझाना है, न कि इसका दुरुपयोग करना।

हलाला के लिए शर्तें
इस्लामी शरीयत में हलाला के लिए कुछ खास शर्तें होती हैं, जिनका पालन करना जरूरी है:

  1. पहले तीन तलाक का होना: हलाला तब ही संभव है जब पति ने अपनी पत्नी को तीन बार तलाक दे दी हो। तीन तलाक के बाद, वह महिला उसी पति से तब तक दोबारा शादी नहीं कर सकती जब तक कि हलाला की प्रक्रिया पूरी न हो जाए।
  2. दूसरी शादी सच्ची और वैध होनी चाहिए: हलाला के लिए महिला को किसी दूसरे मर्द से एक वास्तविक और वैध निकाह करना होगा। इस शादी का उद्देश्य एक असली वैवाहिक संबंध बनाना होना चाहिए, न कि सिर्फ हलाला के लिए। शादी के बाद, महिला को उस नए पति के साथ सामान्य दांपत्य जीवन बिताना होगा।
  3. दूसरे पति से तलाक या उसकी मृत्यु: अगर महिला का दूसरा पति उसे अपनी इच्छा से तलाक दे देता है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो ही वह अपने पहले पति से दोबारा शादी कर सकती है। इस्लाम में यह जरूरी है कि तलाक किसी दबाव या साजिश के तहत न हो, बल्कि स्वाभाविक रूप से हो।

इन शर्तों के साथ ही यह भी जरूरी है कि हलाला का उद्देश्य पवित्र हो और किसी भी तरह की गलत नीयत या धोखाधड़ी शामिल न हो, क्योंकि इस्लाम में इसे निंदा की नजर से देखा जाता है। halal in islam

निष्कर्ष

हलाला इस्लामी शरीयत में एक संवेदनशील मुद्दा है जिसे कुरान और हदीस के अनुसार सही नीयत और उद्देश्य के साथ ही किया जा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य तलाक की प्रक्रिया को गंभीर बनाना और रिश्तों की पवित्रता को बनाए रखना है। जो लोग इसका दुरुपयोग करते हैं, वे न सिर्फ शरीयत का उल्लंघन करते हैं, बल्कि इस्लाम के सिद्धांतों को भी ठेस पहुंचाते हैं।

FAQs

  1. हलाला क्या है और इसका इस्लाम में क्या महत्व है?
    हलाला वह प्रक्रिया है जिसमें एक तलाकशुदा महिला, जिसने तीन तलाक लिए हों, किसी दूसरे पुरुष से निकाह करती है और वैध रूप से तलाक मिलने या दूसरे पति की मृत्यु होने पर अपने पहले पति से फिर से निकाह कर सकती है। इसका उद्देश्य तलाक को हल्के में न लेना है।
  2. क्या हलाला इस्लाम में अनिवार्य है?
    हलाला केवल तब अनिवार्य होता है जब किसी महिला को उसके पति ने तीन तलाक दे दिए हों। उसके बाद, अगर वह अपने पहले पति से पुनः शादी करना चाहती है, तो उसे पहले किसी दूसरे मर्द से निकाह करना होगा।
  3. हलाला में शर्तें क्या होती हैं?
    हलाला के लिए शर्तें यह हैं कि दूसरा निकाह सच्चे इरादे से हो, और इसमें कोई धोखाधड़ी या समझौता न हो। दूसरा पति स्वाभाविक रूप से तलाक दे या उसकी मृत्यु हो, तब ही महिला अपने पहले पति से निकाह कर सकती है।
  4. हलाला का गलत इस्तेमाल क्या है?
    हलाला का गलत इस्तेमाल तब होता है जब इसे केवल पहले पति से दोबारा शादी करने के लिए एक औपचारिकता या योजना के रूप में किया जाता है। इस्लाम में ऐसा करना हराम माना गया है, और इसे नबी-ए-करीम ﷺ ने निंदा की है।
  5. हलाला प्रक्रिया के बारे में कुरान और हदीस क्या कहती हैं?
    कुरान में (सूरह अल-बकरा 2:230) हलाला का उल्लेख है कि तीन तलाक के बाद, महिला तब तक अपने पहले पति से शादी नहीं कर सकती जब तक कि वह किसी अन्य पुरुष से निकाह न कर ले। हदीस में हलाला को गलत नीयत से करने वालों पर लानत भेजी गई है (अबू दाऊद, तिर्मिज़ी)।

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