शब-ए-बारात 2026: क्या है इस रात की फजीलत? जानें सही तारीख और इबादत का तरीका
प्रस्तावना:
इस्लामिक कैलेंडर के आठवें महीने ‘शाबान’ (Sha’ban) की 15वीं रात को शब-ए-बारात के रूप में मनाया जाता है। इसे ‘मगफिरत की रात’ या ‘माफी की रात’ भी कहा जाता है। साल 2026 में यह रात इबादत के लिहाज़ से बहुत अहम है क्योंकि यह रमज़ानुल मुबारक की आमद का संकेत देती है।
2026 में शब-ए-बारात कब है?
भारत और दुनिया भर में चांद दिखने के आधार पर, साल 2026 में शब-ए-बारात बुधवार, 4 फरवरी 2026 की शाम से शुरू होकर 5 फरवरी की सुबह तक रहेगी।
(नोट: सटीक तारीख स्थानीय चांद दिखने पर निर्भर करती है)।
शब-ए-बारात की फजीलत (Virtual Significance)
- गुनाहों से तौबा की रात: माना जाता है कि इस पाक रात में अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ फरमाता है और उनकी तौबा कबूल करता है।
- किस्मत का फैसला: कई मान्यताओं के अनुसार, इस रात अगले एक साल के लिए बंदों की रोजी, जिंदगी, और मौत के फैसले लिखे जाते हैं।
- जहन्नुम से आजादी: ‘शब’ का अर्थ है रात और ‘बारात’ का अर्थ है बरी होना। यानी इस रात अल्लाह इबादत करने वालों को जहन्नुम की आग से बरी फरमाता है।
- दुआओं की कुबूलियत: हदीस के मुताबिक, इस रात अल्लाह दुनिया के आसमान पर नुज़ूल फरमाता है और बंदों को पुकारता है कि क्या कोई माफी मांगने वाला है जिसे मैं माफ करूँ?
इस रात क्या इबादत करें?
- नफ्ल नमाज़: इस रात नफिल नमाज़ पढ़ना और कुरान की तिलावत करना बहुत सवाब का काम है।
- दुआ-ए-मगफिरत: अपने लिए, अपने परिवार और पूरी उम्मत के लिए माफी और खैर की दुआ करें。
- कब्रिस्तान की ज़ियारत: सुन्नत के मुताबिक, इस रात अपने पूर्वजों और दुनिया से जा चुके करीबियों की कब्र पर जाकर उनके लिए दुआ-ए-मगफिरत करना मुफीद है।
- शाबान का रोज़ा: 15 शाबान का रोज़ा रखना भी अफज़ल माना जाता है।
निष्कर्ष:
शब-ए-बारात सिर्फ हलवा खाने या चिरागां करने की रात नहीं है, बल्कि यह अपने रब्ब को राज़ी करने और अपने आमाल को सुधारने का मौका है। कोशिश करें कि इस रात को बेकार के कामों (जैसे बाइक रेसिंग या पटाखों) में न गुज़ारें बल्कि इबादत में वक्त बिताएं।